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History of India
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ब्रिटिश भारत में लागू की गई विभिन्न भू-राजस्व प्रणालियों — स्थाई बंदोबस्त, रयतवारी और महालवारी — के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. बंगाल प्रेसिडेंसी में लॉर्ड कार्नवालिस द्वारा वर्ष 1793 में लागू किए गए 'स्थाई बंदोबस्त' के तहत जमींदारों को भूमि का स्थाई स्वामी बना दिया गया, किंतु 'सूर्ي अस्त कानून' (Sunset Law) के अंतर्गत यदि निश्चित तिथि तक सूर्यास्त से पहले भू-राजस्व जमा नहीं किया जाता था, तो उनकी जमींदारी नीलाम कर दी जाती थी।
  2. 2. थॉमस मुनरो द्वारा मुख्य रूप से मद्रास और बॉम्बे प्रेसिडेंसी में लागू 'रयतवारी व्यवस्था' में सरकार और कृषक (रयत) के बीच सीधा समझौता होता था, जिसमें किसानों को मालिकाना हक तो मिला, किंतु लगान की दरें अत्यधिक ऊँची थीं और सरकार को राजस्व समीक्षा के बाद हर 30 वर्ष पर कर दरों में वृद्धि करने का अधिकार प्राप्त था।
  3. 3. उत्तर-पश्चिम प्रांत, मध्य भारत और पंजाब के कुछ हिस्सों में हॉल्ट मैकेंज़ी द्वारा प्रवर्तित 'महालवारी व्यवस्था' के अंतर्गत भू-राजस्व निर्धारण के लिए व्यक्तिगत किसानों को नहीं, बल्कि पूरे ग्राम समुदाय या 'महाल' को एक इकाई माना जाता था, और इस प्रणाली में गाँव के प्रत्येक किसान की व्यक्तिगत जिम्मेदारी होती थी, जबकि सामूहिक या संयुक्त जिम्मेदारी का कोई प्रावधान नहीं था।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?

Detailed Explanation

कथन 1 सही है क्योंकि स्थाई बंदोबस्त के तहत 'सूर्यास्त कानून' (Sunset Law) लागू किया गया था, जिसके अंतर्गत निर्धारित तिथि को सूर्यास्त तक लगान न चुकाने पर जमींदारों की नीलामी कर दी जाती थी। कथन 2 भी सही है; रयतवारी व्यवस्था के तहत किसानों से सीधा संपर्क था, मालिकाना हक मिला था, परंतु राजस्व की दरें बहुत अधिक थीं और सरकार हर 30 वर्षों पर दरों की पुनः समीक्षा कर सकती थी। कथन 3 गलत है क्योंकि महालवारी व्यवस्था में पूरे गाँव (महाल) को इकाई माना जाता था और इस प्रणाली की मुख्य विशेषता कृषकों की 'संयुक्त जिम्मेदारी' (Joint Responsibility) थी, न कि केवल व्यक्तिगत जिम्मेदारी। अधिक जानकारी के लिए विकिपीडिया संदर्भ देख सकते हैं।
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